Sāvitrī’s Report and Nārada’s Prognosis (सावित्र्याख्यान—सत्यवान्-गुणवर्णनं तथा अल्पायुषः पूर्वसूचना)
रक्षार्थ तापसानां तु राघवो धर्मवत्सल: । चतुर्दश सहस्राणि जघान भुवि रक्षसाम्,धर्मवत्सल श्रीरामचन्द्रजीने तपस्वी मुनियोंकी रक्षाके लिये महाबली खर और दूषणको मारकर वहाँके चौदह हजार राक्षसोंका संहार कर डाला तथा उन बुद्धिमान् रघुनाथजीने पुनः उस वनको क्षेमकारक धर्मारण्य बना दिया
rakṣārthaṁ tāpasānāṁ tu rāghavo dharmavatsalaḥ | caturdaśa sahasrāṇi jaghāna bhuvi rakṣasām ||
Ради защиты подвижников Рагхава, преданный дхарме, сразил на земле четырнадцать тысяч ракшасов.
(श्रीरम उवाच