Kuvalāśva’s Lineage and Uttaṅka’s Petition concerning Dhundhu (धुन्धु-प्रसङ्गः)
राजोवाच ये त्वां विदुर्ब्राह्मणं वामदेव वाचा हन्तुं मनसा कर्मणा वा | ते त्वां सशिष्यमिह पातयन्तु मद्वाक्यनुन्ना:ःशितशूलासिहस्ता:,राजाने कहा--वामदेवजी! आप ब्राह्मण हैं तो भी मन, वाणी एवं क्रियाद्वारा मुझे मारनेको उद्यत हैं, इसका पता हमारे जिन सेवकोंको चल गया है, वे मेरी आज्ञा पाते ही हाथोंमें तीखे त्रिशूल तथा तलवार लेकर शिष्योंसहित आपको पहले ही यहाँ मार गिरावेंगे
rājovāca ye tvāṁ vidur brāhmaṇaṁ vāmadeva vācā hantuṁ manasā karmaṇā vā | te tvāṁ saśiṣyam iha pātayantu madvākya-nunnāḥ śitaśūlāsi-hastāḥ ||
Царь сказал: «О Вамадева, хотя ты и брахман, ты вознамерился убить меня словом, мыслью или делом. Мои люди, узнавшие об этом, едва получат мой приказ, с оружием в руках — острыми трезубцами и мечами — повергнут тебя здесь вместе с твоими учениками».
वामदेव उवाच