कामीकवन-समागमः
Kāmyaka Forest Meeting: Kṛṣṇa’s Visit; Mārkaṇḍeya and Nārada Arrive
इति चाप्यहमश्रौषं वचस्तेषां दयावताम् मयि संजातहार्दानामथ तेडन्तर्हिता द्विजा:,इस प्रकार मेरे प्रति हार्दिक दयाभाव उत्पन्न हो जानेके कारण उन दयालु महर्षियोंने जो बात कही थी, वह भी मैंने स्पष्ट सुनी। तत्पश्चात् वे सारे ब्रह्मर्षि अन्तर्धान हो गये
И я ясно услышал слова тех сострадательных великих мудрецов, чьи сердца прониклись ко мне. А затем все те брахмариши скрылись и исчезли из виду.
वैशम्पायन उवाच