Adhyāya 168: Arjuna’s counters to māyā-rains and the onset of darkness
Nivātakavaca engagement
दुरासदं दुष्प्रसहं सुरदानवराक्षसै: । अनुज्ञातस्त्वहं तेन तत्रैव समुपाविशम्,वह शत्रुओंका संहारक और विपक्षियोंकी सेनाका विध्वंसक है। उसकी प्राप्ति बहुत कठिन है। देवता, दानव तथा राक्षस किसीके लिये भी उसका वेग सहन करना अत्यन्त कठिन है। फिर भगवान् शिवकी आज्ञा होनेपर मैं वहीं बैठ गया और वे मेरे देखते-देखते अन्तर्धान हो गये
durāsadaṁ duṣprasahaṁ suradānavarākṣasaiḥ | anujñātas tv ahaṁ tena tatraiva samupāviśam |
Арджуна сказал: «Та божественная сила (оружие) недоступна и невыносима — даже для богов, данавов и ракшасов. Её натиск трудно выдержать кому бы то ни было. Затем, получив дозволение Господа Шивы, я сел там же; и на моих глазах он исчез из виду».
अजुन उवाच