Plakṣāvataraṇa–Yamunā Tīrtha and Prajāpati’s Vedī
Kurukṣetra Threshold
अद्य चात्र निवत्स्याम: क्षपां भरतसत्तम । द्वारमेतत् तु कौन्तेय कुरुक्षेत्रस्य भारत,भरतश्रेष्ठ! (इस किंवदन्तीके अनुसार किसीको भी यहाँ एक ही रात रहना चाहिये) अतः हमलोग केवल आजकी रातमें ही यहाँ निवास करेंगे। युधिष्ठिर! यह तीर्थ कुरुक्षेत्रका द्वार बताया गया है
«И сегодня, о лучший из Бхарат, мы останемся здесь лишь на эту ночь. О Каунтея, о Бхарата, этот тиртха называют вратами Курукшетры».
लोगश उवाच