पराक्रमे शक्रसमो मातरिश्व॒समो बले । महेश्वरसम: क्रोधे भीम: प्रहरतां वर:,“मधुसूदन! जो पाण्डुनन्दन महाबली भीम दस हजार हाथियोंके समान शक्तिशाली है, जिसका वेग वायुके समान है, जो असहिष्णु होते हुए भी अपने भाईको सदा ही प्रिय है और भाइयोंका प्रिय करनेमें ही लगा रहता है, जिसने भाई-बन्धुओंसहित कीचकका विनाश किया है, जिस शूरवीरके हाथसे क्रोधवश नामक राक्षसोंका, हिडिम्बासुर तथा बकका भी संहार हुआ है, जो पराक्रममें इन्द्र, बलमें वायुदेव तथा क्रोधमें महेश्वरके समान है, जो प्रहार करनेवाले योद्धाओंमें सर्वश्रेष्ठ एवं भयंकर है, शत्रुओंको संताप देनेवाला जो पाण्डुपुत्र भीम अपने भीतर क्रोध, बल और अमर्षको रखते हुए भी मनको काबूमें रखकर सदा भाईकी आज्ञाके अधीन रहता है, जो स्वभावत:ः अमर्षशील है, जिसमें तेजकी राशि संचित है, जो महात्मा, सर्वश्रेष्ठ, अमिततेजस्वी तथा देखनेमें भी भयंकर है, वृष्णिनन्दन जनार्दन! उस मेरे द्वितीय पुत्र भीमसेनका समाचार बताओ। इस समय परिघके समान सुदृढ़ भुजाओंवाला मेरा मँझला पुत्र पाण्डुकुमार भीमसेन कैसे है?
vaiśampāyana uvāca |
parākrame śakrasamo mātariśvasamo bale |
maheśvarasamaḥ krodhe bhīmaḥ praharatāṃ varaḥ ||
Вайшампаяна сказал: «В доблести он равен Шакре (Индре), в силе — Матаришвану (Ваю), а в гневе — Махешваре (Шиве). Бхима — первый среди тех, кто наносит удары.»
वैशम्पायन उवाच
The verse elevates Bhīma through divine comparisons—valor like Indra, strength like Vāyu, wrath like Śiva—yet, in the broader epic context, such power is ethically meaningful only when governed by dharma and disciplined purpose rather than uncontrolled rage.
Vaiśampāyana describes Bhīma’s extraordinary martial qualities in heightened epic style, presenting him as the foremost striker among warriors by likening his key attributes to major deities.