कुरुसभायां केशवागमन-सत्कारविधानम् / Preparations to Honor Keśava at the Kuru Court
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ ३ *लोक मिलाकर कुल ७७ ६ “लोक हैं।] व््य्््न्च्ध्् श्यु आप आय चतुरशीतितमो< ध्याय: मार्गके शुभाशुभ हे 26247 तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना वैशम्पायन उवाच प्रयान्तं देवकीपुत्रं परवीररुजो दश । महारथा महाबाहुमन्वयु: शस्त्रपाणय:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! शत्रुओंको संताप देनेवाले नरेश! महाबाहु श्रीकृष्णके प्रस्थान करते समय विपक्षी वीरोंपर विजय पानेवाले शस्त्रधारी दस महारथी, एक हजार पैदल योद्धा, एक हजार घुड़सवार, प्रचुर खाद्य-सामग्री तथा दूसरे सैकड़ों सेवक उनके साथ गये
vaiśampāyana uvāca | prayāntaṃ devakīputraṃ paravīrarujo daśa | mahārathā mahābāhum anvayuḥ śastrapāṇayaḥ ||
Вайшампаяна сказал: О царь Джанамеджая, когда сын Девакӣ (Кришна), могучерукий, выступил в путь, за ним последовали десять великих колесничих-воителей — с оружием в руках, способные сокрушать вражеских героев. Эта сцена подчёркивает тяжесть миссии Кришны: даже посланник мира движется среди реалий силы, охраны и надвигающейся тени войны.
वैशम्पायन उवाच