अपन का छा ] अतडकडज अशीतितमो<ध्याय: नकुलका निवेदन नकुल उवाच उक्त बहुविध॑ वाक््यं धर्मराजेन माधव । धर्मज्ञेन वदान्येन श्रुतं चैव हि तत् त्वया,नकुल बोले--माधव! धर्मज्ञ और उदार धर्मराजने बहुत-सी बातें कही हैं और आपने उन्हें सुना है
Накула сказал: «О Мадхава, Дхармараджа, знающий дхарму и щедрый, произнёс многие речи, и ты их выслушал».
नकुल उवाच