अध्याय ६६: संजयेन जनार्दन-प्रभाववर्णनम्
Sañjaya on Janārdana’s Decisive Sovereignty
व्यास उवाच सम्पृच्छते धृतराष्ट्राय संजय आचरक्ष्व सर्व यावदेषो<नुयुद्धक्ते । सर्व यावत् वेत्थ तस्मिन् यथावद् याथातथ्यं वासुदेवे3र्जुने च,व्यासजीने कहा--संजय! धुृतराष्ट्र तुमसे जो कुछ जानना चाहते हैं, वह सब इन्हें बताओ। ये भगवान् श्रीकृष्ण तथा अर्जुनके विषयमें जो कुछ पूछते हैं, वह सब, जितना तुम जानते हो, उसके अनुसार यथार्थरूपसे कहो
Вьяса сказал: Санджая, всё, о чём Дхритараштра тебя спрашивает, поведай ему целиком. И о Васудеве (Кришне) и об Арджуне — что бы он ни спросил, скажи правду как должно, согласно всему, что тебе известно.
व्यास उवाच