Udyoga Parva 21 — Bhīṣma’s Conciliatory Counsel, Karṇa’s Rebuttal, and Dhṛtarāṣṭra Sends Sañjaya (भीष्म-कर्ण-विवादः; संजय-प्रेषणम्)
अपि वज्रधर: साक्षात् किमुतान्ये धनुर्भुतः । त्रयाणामपि लोकानां समर्थ इति मे मति:,'साक्षात् वज्रधारी इन्द्र भी युद्धमें उनका सामना नहीं कर सकते; फिर दूसरे धनुर्धरोंकी बात ही क्या है? मेरा तो ऐसा विश्वास है कि अर्जुन तीनों लोकोंका सामना करनेमें समर्थ हैं!
«Даже сам Индра, владыка с ваджрой в руке, не смог бы противостоять ему в битве; что уж говорить о прочих лучниках! По моему разумению, Арджуна способен бросить вызов трём мирам.»
वैशम्पायन उवाच