Drupada’s Alarm and Inquiry Regarding Śikhaṇḍinī (द्रुपदस्य भय-विमर्शः)
यदाह मां भवान् ब्रह्मन् सम्बन्धिवचनाद् वच: । अस्योत्तरं प्रतिवचो दूतो राज्ञे वदिष्यति,भरतश्रेष्ठ! तब राजा ट्रुपद प्रेमसे विनीत हो गये और इस प्रकार बोले--'ब्रह्मन्! आपने मेरे सम्बन्धीके कथनानुसार जो बात मुझे सुनायी है, इसका उत्तर मेरा दूत स्वयं जाकर राजाको देगा”
«О брахман, слова, которые ты сказал мне по слову моего родича, — мой ответ, моё возражение, посол донесёт царю.»
भीष्म उवाच