अम्बायाः तपोदीक्षा–रुद्रवर–आत्मदाहः
Amba’s Ascetic Vow, Rudra’s Boon, and Self-Immolation
चोदयामास भार्यार्थ कन्याया: पुत्रवत् तदा । ततस्तां पार्षतो दृष्टवा कन्यां सम्प्राप्तयौवनाम् । स्त्रियं मत्वा तततद्रिन्तां प्रपेदे सह भार्यया,राजेन्द्र! धनुर्विद्याके लिये शिखण्डी द्रोणाचार्यका शिष्य हुआ। महाराज! शिखण्डीकी सुन्दरी माताने राजा द्रुपदको प्रेरित किया कि वे उसके पुत्रके लिये बहू ला दें। वह अपनी कन्याका पुत्रके समान ब्याह करना चाहती थी। ट्रुपदने देखा, मेरी बेटी जवान हो गयी तो भी अबतक स्त्री ही बनी हुई है (वरदानके अनुसार पुरुष नहीं हो सकी), इससे पत्नीसहित उनके मनमें बड़ी चिन्ता हुई
codayāmāsa bhāryārthaṁ kanyāyāḥ putravat tadā | tatas tāṁ pārṣato dṛṣṭvā kanyāṁ samprāptayauvanām | striyaṁ matvā tat-tad-cintāṁ prapede saha bhāryayā rājendra |
Бхишма сказал: Тогда царица стала побуждать царя добыть супругу для их чада, обращаясь с дочерью так, словно она была сыном. Затем, когда Друпада увидел, что дева достигла юности, но всё же остаётся женщиной, он—вместе со своей супругой—впал в глубокую и вновь и вновь возвращающуюся тревогу, о лучший из царей.
भीष्म उवाच