सौभराजमुपेत्याहमवोचं दुर्वचं वच: । नच मां प्रत्यगृह्लात् स चारित््यपरिशड्कितः,तब सौभराजके पास जाकर मैंने उनसे ऐसी बातें कहीं जिन्हें अपने मुँहसे कहना स्त्रीजातिके लिये अत्यन्त दुष्कर होता है; परंतु मेरे चरित्रपर संदेह हो जानेके कारण उसने मुझे स्वीकार नहीं किया
Я пришла к царю Саубхи и произнесла слова, которые женщине крайне трудно вымолвить собственными устами. Но, усомнившись в моей чистоте, он не принял меня.
राम उवाच