भीष्म–दुर्योधनसंवादः — शिखण्डिनं न हन्तुं कारणकथनम्
Amba-ākhyāna prologue
अपन प्रात छा अंक एकसप्तत्याधिकशततमो< ध्याय: पाण्डवपक्षके रथी, महारथी एवं अतिरथी आदिका वर्णन भीष्म उवाच पडज्चालराजस्य सुतो राजन् परपुरंजय: । शिखण्डी रथमुख्यो मे मत: पार्थस्य भारत,भीष्मजी कहते हैं-राजन! भरतनन्दन! पांचालराज द्रुपदका पुत्र शिखण्डी शत्रुओंकी नगरीपर विजय पानेवाला है, मैं उसे युधिष्ठिरकी सेनाका एक प्रमुख रथी मानता हूँ
bhīṣma uvāca | pañcālarājasya suto rājan parapuraṃjayaḥ | śikhaṇḍī rathamukhyo me mataḥ pārthasya bhārata ||
Бхишма сказал: «О царь, о потомок Бхараты! Шикханди, сын Друпады, царя Панчалы, — покоритель вражеских крепостей. По моему суждению, он числится среди первейших колесничих на стороне Партхи (Пандавов).»
भीष्म उवाच