भीष्मकृतः पाण्डवपक्ष-महारथ-प्रशंसा
Bhishma’s appraisal of Pandava-aligned chariot-warriors
परुष: कत्थनो नीच: कर्णो वैकर्तनस्तव । मन्त्री नेता च बन्धुश्न मानी चात्यन्तमुच्छित:,राजन! यह जो तुम्हारा प्रिय सखा कर्ण है, जो तुम्हें पाण्डवोंके साथ युद्धके लिये सदा उत्साहित करता रहता है और रणक्षेत्रमें सदा अपनी क्रूरताका परिचय देता है, बड़ा ही कटुभाषी, आत्मप्रशंसी और नीच है। यह कर्ण तुम्हारा मन्त्री, नेता और बन्धु बना हुआ है। यह अभिमानी तो है ही, तुम्हारा आश्रय पाकर बहुत ऊँचे चढ़ गया है
paruṣaḥ katthano nīcaḥ karṇo vaikartanas tava | mantrī netā ca bandhuś ca mānī cātyantam ucchritaḥ ||
Бхишма сказал: «Твой Карна, Вайкартана, сын возничего, груб в речах, хвастлив и низок по нраву. И всё же он стал твоим советником, твоим вождём и твоим родичем; и, исполненный гордыни, он чрезмерно возвысился под твоим покровительством».
भीष्म उवाच