सेनापति-निर्णयः तथा पाण्डवसेनायाः कुरुक्षेत्रगमनम्
Decision on Command and the Pandavas’ March to Kurukshetra
सर्व भवतु ते राज्यं पञ्च ग्रामान् विसर्जय । अवश्यं भरणीया हि पितुस्ते राजसत्तम,मैंने कहा--नृपश्रेष्ठ! यद्यपि पाण्डव शौर्यसे सम्पन्न हैं, तथापि वे सब-के-सब अभिमान छोड़कर भीष्म, धृतराष्ट्र और विदुरके नीचे रह सकते हैं। वे अपना राज्य भी तुम्हींको दे दें और सदा तुम्हारे अधीन होकर रहें। राजा धृतराष्ट्र, भीष्म और विदुरजीने तुम्हारे हितके लिये जैसी बात कही है, वैसा ही करो। सारा राज्य तुम्हारे ही पास रहे। तुम पाण्डवोंको पाँच ही गाँव दे दो; क्योंकि तुम्हारे पिताके लिये पाण्डवोंका भरण-पोषण करना भी परम आवश्यक है
sarvaṁ bhavatu te rājyaṁ pañca grāmān visṛjya | avaśyaṁ bharaṇīyā hi pituḥ te rājasattama ||
Ваю сказал: «Пусть всё царство будет твоим; им же отпусти лишь пять деревень. Ибо, о лучший из царей, твоему отцу поистине надлежит содержать их — это неизбежный долг.»
वायुदेव उवाच