तस्य बुद्धि: समुत्पन्ना द्वितीय: स्थात् कथं सुतः । एकपुत्रमपुत्रं वै प्रवदन््ति मनीषिण:,“अत: उनके मनमें यह विचार उत्पन्न हुआ कि "मेरे दूसरा पुत्र कैसे हो? क्योंकि मनीषी पुरुष एक पुत्रवालेको पुत्रहीन ही बताते हैं
И тогда в его разуме возникла мысль: «Как мне обрести второго сына? Ведь мудрецы говорят: имеющий одного сына — поистине словно бездетен».
वायुदेव उवाच