Divodāsa–Mādhavī Saṃvāda: Pratardana-janma and Kanyā-niryātana (दिवोदास–माधवी संवादः / प्रतर्दन-जननम् / कन्या-निर्यातनम्)
जातो नृप सुतस्ते5यं बालो भास्करसंनिभ:। कालो गन्तुं नरश्रेष्ठ भिक्षार्थमपरं नृपम्,“नरश्रेष्ठ नरेश! आपको यह सूर्यके समान तेजस्वी पुत्र प्राप्त हो गया। अब इस कनन््याके साथ घोड़ोंकी याचना करनेके लिये दूसरे राजाके यहाँ जानेका अवसर उपस्थित हुआ है!
jāto nṛpa sutaste ’yaṃ bālo bhāskarasaṃnibhaḥ | kālo gantuṃ naraśreṣṭha bhikṣārtham aparaṃ nṛpam ||
Нарада сказал: «О царь, у тебя родился сын — ещё дитя, но сияющий, как солнце. Ныне же, о лучший из людей, пришло время идти к другому владыке и просить (как дар) коней».
नारद उवाच