राजधर्मः—प्रमादवर्जनं, दण्डनीतिः, दुर्बलरक्षणम्
Royal Dharma: Vigilance, Just Punishment, Protection of the Vulnerable
संविभज्य यदा भुड्क्ते नृपतिर्दुर्बलान् नरान् । तदा भवन्ति बलिन: स राज्ञो धर्म उच्यते,जब राजा दुर्बल मनुष्योंको यथावश्यक वस्तुएँ देकर पीछे स्वयं भोजन करता है, तब वे दुर्बल मनुष्य बलवान हो जाते हैं। वह त्याग राजाका धर्म कहा गया है
saṁvibhajya yadā bhuṅkte nṛpatir durbalān narān | tadā bhavanti balinaḥ sa rājño dharma ucyate ||
Утаттхья сказал: Когда царь сперва раздаёт припасы слабым и лишь затем вкушает свою пищу, те, кто был бессилен, становятся сильными. Такое самообуздание и дарение провозглашаются царской дхармой.
उतथ्य उवाच