ब्राह्मण उवाच धर्मारण्यं हि मां विद्धि नागं द्रष्टमिहागतम् । पद्मनाभं द्विजश्रेष्ठ तत्र मे कार्यमाहितम्,ब्राह्मणने कहा--द्विजश्रेष्ठ! आपको विदित हो कि मेरा नाम धर्मरिण्य है। मैं नागराज पद्मनाभका दर्शन करनेके लिये यहाँ आया हूँ। उन्हींसे मुझे कुछ काम है
Брахман сказал: «О лучший из дважды-рождённых! Знай: имя моё — Дхармаранья. Я пришёл сюда, чтобы узреть царя нагов Падманабху; к нему у меня есть дело».
ब्राह्मण उवाच