चिरकारि-उपाख्यानम् / The Exemplum of Cirakārī: Deliberation Before Irreversible Action
ऑपन---#र< बक। ] अत्शऑशाएड<ह एकोनषष्टर्याधिकद्विशततमो< ध्याय: धर्माधर्मके स्वरूपका निर्णय युधिषछ्िर उवाच इमे वै मानवा: सर्वे धर्म प्रति विशड्किता: । को<थयं धर्म: कुतो धर्मस्तन्मे ब्रूहि पितामह,युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! ये सभी मनुष्य प्राय: धर्मके विषयमें संशयशील हैं; अतः मैं जानना चाहता हूँ कि धर्म क्या है? और उसकी उत्पत्ति कहाँसे हुई है? यह मुझे बताइये
Yudhiṣṭhira uvāca: ime vai mānavāḥ sarve dharmaṃ prati viśaṅkitāḥ | ko ’yaṃ dharmaḥ kuto dharmas tan me brūhi pitāmaha ||
Юдхиштхира сказал: «Дед, все люди и впрямь терзаемы сомнением, когда речь заходит о дхарме. Что же такое дхарма поистине — и откуда возникает дхарма? Прошу, поведай мне».
युधिषछ्िर उवाच