Adhyāya 241: Guṇa-sṛṣṭi, Kṣetrajña-sākṣitva, and Śama through Ātma-jñāna (गुणसृष्टिः, क्षेत्रज्ञसाक्षित्वं, शमः)
तदेतदृषिणा प्रोक्तं विस्तरेणानुमीयते । नवजं शशिन दृष्टवा वक्रतन्तुमिवाम्बरे,“इस बातको एक मन्त्रद्र्ठ ऋषिने विस्तारके साथ बताया है। अमावास्याके बाद आकाशमें एक टेढ़े और पतले सूतके समान प्रतीत होनेवाले नवोदित चन्द्रमाको देखकर ऐसा ही अनुमान किया जाता है
«Об этом подробно сказал риши, зрящий мантры; и так же можно заключить, увидев после ночи новолуния молодой месяц в небе — словно тонкую изогнутую нить.»
भीष्म उवाच