शक्र उवाच बले केयमपक्रान्ता रोचमाना शिखण्डिनी । त्वत्त: स्थिता सकेयूरा दीप्यमाना स्वतेजसा,इन्द्र बोले--बले! यह वेणी धारण करनेवाली कान्तिमयी कौन सुन्दरी तुम्हारे शरीरसे निकल कर खड़ी है? इसकी भुजाओंमें बाजूबंद शोभा पा रहे हैं और यह अपने तेजसे उद्भासित हो रही है
Шакра (Индра) сказал: «О Бали, кто эта сияющая красавица с заплетёнными волосами, что вышла из твоего тела и стоит здесь? На её руках — браслеты, и она светится собственным блеском».
शक्र उवाच