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Shloka 59

Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman

Manu’s Instruction

संश्रुतं च मया पूर्व ददानीत्यविचारितम्‌ । तद्‌ गृह्नीष्वाविचारेण यदि सत्ये स्थितो भवान्‌,मैंने बिना कुछ सोच-विचार किये ही पहले देनेकी प्रतिज्ञा कर ली है; अतः आप भी बिना विचारे मेरा दिया हुआ जप ग्रहण करें। यदि आप सत्यपर दृढ़ हैं तो आपको ऐसा अवश्य करना चाहिये

Я прежде, не раздумывая, дал обещание: «Я дам». Потому возьми без колебаний то, что я тебе даровал. Если ты стоишь в истине, тебе надлежит поступить так.

ब्राह्मण उवाच