Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
कालने कहा--विप्रवर! तुम्हारे इस जपका यथायोग्य सर्वोत्तम फल प्राप्त हुआ है। अतः अब तुम्हारे लिये स्वर्गलोकमें जानेका समय आया है। यही सूचित करनेके लिये मैं साक्षात् काल तुम्हारे पास आया हूँ ।। मृत्युरुवाच मृत्युं मां विद्धि धर्मज्ञ रूपिणं स्वयमागतम् । कालेन चोदितो विप्र त्वामितो नेतुमद्य वै,मृत्युने कहा--धर्मज्ञ ब्राह्मण! मुझे मृत्यु समझो। मैं स्वयं ही शरीर धारण करके यहाँ आया हूँ। विप्रवर! मैं कालसे प्रेरित होकर आज तुम्हें यहाँसे ले जानेके लिये उपस्थित हुआ हूँ
mṛtyur uvāca—mṛtyuṁ māṁ viddhi dharmajña rūpiṇaṁ svayam āgatam | kālena codito vipra tvām ito netum adya vai ||
Смерть сказала: «Знай меня как Смерть — принявшую зримый облик и пришедшую сюда по собственной воле, о ведающий дхарму. О лучший из брахманов, побуждённая Временем, я пришла сегодня, чтобы увести тебя отсюда».
काल उवाच