The Thirteen Inner Adversaries (Trayodaśa Doṣāḥ): Origins and Pacification
इस प्रकार श्रीमह्ा भारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें पवन-शाल्मलिसंवादविषयक एक सौ पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १५५ ॥/ #त-८5 >> श््मु # >> षट्पज्चाशर्दाधेकशततमो< ध्याय: नारदजीकी बात सुनकर वायुका सेमलको धमकाना और सेमलका वायुको तिरस्कृत करके विचारमग्न होना भीष्म उवाच एवमुक्त्वा तु राजेन्द्र शाल्मलिं ब्रह्म॒वित्तम: । नारद: पवने सर्व शाल्मलेवॉक्यमब्रवीत्,भीष्मजी कहते हैं--राजेन्द्र! सेमलसे ऐसा कहकर ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ नारदजीने वायुदेवके पास आकर उसकी सब बातें कह सुनायीं
Bhīṣma uvāca: evam uktvā tu rājendra śālmalīṃ brahmavittamaḥ | nāradaḥ pavane sarvaṃ śālmalī-vākyam abravīt ||
Бхишма сказал: «О царь, сказав так дереву Шальмали, Нарада — лучший среди познавших Брахмана — отправился к Ваю и полностью передал ему все слова, произнесённые Шальмали».
भीष्म उवाच