Śaraṇāgata-Atithi-Dharma in the Kapota Narrative (कपोत-आख्यानम्—शरणागतधर्मः)
बलवन्तं करिष्यामि प्रणोत्स्याम्पशुभानि तु । तपोभिर्विद्यया चैव ज्योतींषीव महत्तम:,'जैसे सूर्य आदि ज्योतिर्मय ग्रह महान् अन्धकारका नाश कर देते है, उसी प्रकार मैं पुनः तप और विद्याद्वारा जब अपने-आपको सबल कर लूँगा, तब सारे अशुभ कर्मोंका नाश कर डालूँगा'
balavantaṁ kariṣyāmi praṇotsyām apāśubhāni tu | tapobhir vidyayā caiva jyotīṁṣīva mahattamaḥ ||
«Я вновь сделаю себя сильным и изгоню всякую неблагость. Подвижничеством и знанием я уничтожу злые деяния — как великие светила, солнце и прочие сияющие небесные тела, рассеивают тьму».
घपच उवाच