Śālva’s Elephant Assault and the Counterstroke (शाल्वस्य नागारूढाभ्यवहारः)
यदा शूरं च भीरुं च मारयत्यन्तक: सदा | को नु मूढो न युध्येत पुरुष: क्षत्रियो ध्रुवम्,“जितने क्षत्रिय यहाँ एकत्र हुए हैं, वे सब कान खोलकर सुन लें--जब शूरवीर और कायर सभीको सदा ही मौत मार डालती है, तब ऐसा कौन मूर्ख मनुष्य है, जो क्षत्रिय कहलाकर भी निश्चितरूपसे युद्ध नहीं करेगा
Когда Антака, Смерть, неизменно поражает и храброго и труса, кто же окажется столь безумным человеком, чтобы, будучи кшатрией, наверняка не вступить в бой?
संजय उवाच