यमसभावर्णनम् (Yamasabhā-varṇanam) — Nārada’s Description of Dharmarāja’s Assembly
शान्ता: संन्यासिन: शुद्धा: पूता: पुण्येन कर्मणा । सर्वे भास्वरदेहा श्व॒ सर्वे च विरजो>म्बरा:,भारत! वह सभा अपने तेजसे प्रज्वलित तथा उद्धासित होती रहती है। कठोर तपस्या और उत्तम व्रतका पालन करनेवाले, सत्यवादी, शान्त, संन्यासी तथा अपने पुण्यकर्मसे शुद्ध एवं पवित्र हुए पुरुष उस सभामें जाते हैं। उन सबके शरीर तेजसे प्रकाशित होते रहते हैं। सभी निर्मल वस्त्र धारण करते हैं
śāntāḥ saṁnyāsinaḥ śuddhāḥ pūtāḥ puṇyena karmaṇā | sarve bhāsvaradehāś ca sarve ca virajo'mbarāḥ |
Нарада сказал: «Входящие в то собрание — спокойные и обуздавшие себя: отрекшиеся, очищенные и освящённые благими деяниями. Все они сияют лучезарными телами, и все носят безупречно чистые одежды.»
नारद उवाच