Dyūta-kathā-praśnaḥ — Inquiry into the Dice-Game Calamity
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४२ श्लोक मिलाकर कुल ११० श्लोक हैं) नशा (0) आज अत न (द्यूतपर्व) षट्चत्वारिशो< ध्याय: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिछिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा वैशम्पायन उवाच समाप्ते राजसूये तु क्रतुश्रेष्ठे सुदुर्लभे । शिष्यै: परिवृतो व्यास: पुरस्तात् समपद्यत,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! यज्ञोंमें श्रेष्ठ परम दुर्लभ राजसूययज्ञके समाप्त हो जानेपर शिष्योंसे घिरे हुए भगवान् व्यास राजा युधिष्ठिरके पास आये
vaiśampāyana uvāca | samāpte rājasūye tu kratuśreṣṭhe sudurlabhe | śiṣyaiḥ parivṛto vyāsaḥ purastāt samapadyata |
Вайшампаяна сказал: О Джанамеджая, когда завершилось раджасуя — величайшее из жертвоприношений и чрезвычайно труднодостижимое, — Вьяса, окружённый своими учениками, выступил вперёд и явился к царю Юдхиштхире.
वैशम्पायन उवाच