उसी वैरको याद करके यह अवश्य अपने वधके लिये ही तुमसे भिड़ना चाहता है। शत्रुसूदन! आकाशसे गिरती हुई प्रज्वलित उल्काके समान आते हुए इस सर्पको देखो ।। संजय उवाच ततः स जिष्णु: परिवृत्य रोषा- च्चिच्छेद षड़भिननिशितै: सुधारै: । नागं वियत्तिर्यगिवोत्पतन्तं स च्छिन्नगात्रो निपपात भूमौ
sañjaya uvāca | tataḥ sa jiṣṇuḥ parivṛtya roṣāc ciccheda ṣaḍbhir ati-niśitaiḥ sudhāraiḥ | nāgaṃ viyad-tiryag ivotpatantaṃ sa chinna-gātro nipapāta bhūmau ||
Санджая сказал: Тогда Джишну (Арджуна), обернувшись в гневе, рассёк змея шестью чрезвычайно острыми, отлично отточенными стрелами. Змей, метнувшись в сторону в небесной выси, пал на землю, с отсечёнными членами.
संजय उवाच