कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
गत: स कष्ट नरकं सूक्ष्म धर्मेष्वकोविद: । तब उन निर्दयी डाकुओंने उन सबका पता पाकर उन्हें मार डाला, ऐसा सुना गया है। इस तरह वाणीका दुरुपयोग करनेसे कौशिकको महान् पाप लगा, जिससे उसे नरकका कष्ट भोगना पड़ा; क्योंकि वह धर्मके सूक्ष्म स्वरूपको समझनेमें कुशल नहीं था
Слышали, что те безжалостные разбойники, разузнав их след, перебили всех. Так, злоупотребив речью, Каушика навлёк на себя великий грех и вынужден был терпеть муки ада; ибо он не постиг тончайших различий дхармы.
वायुदेव उवाच