कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
अदृष्टपूर्वमपि तत् सत्त्वं तेन हतं तदा । अन्धे हते ततो व्योम्न: पुष्पवर्ष पपात च,यद्यपि वैसे जानवरको व्याधने पहले कभी नहीं देखा था, तो भी उस समय उसने मार डाला। उस अंधे पशुके मारे जाते ही आकाशसे व्याधपर फूलोंकी वर्षा होने लगी
adṛṣṭapūrvam api tat sattvaṃ tena hataṃ tadā | andhe hate tato vyomnaḥ puṣpavarṣaṃ papāta ca ||
Хотя прежде он никогда не видел такого существа, тогда он всё же убил его. И как только слепой зверь был сражён, с небес на охотника пролился дождь цветов.
वायुदेव उवाच