कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
समक्ष तव गोविन्द न तत् क्षन्तुमिहोत्सहे | तस्मादेनं वधिष्यामि राजानं धर्मभीरुकम्,“जो मुझसे यह कह दे कि तुम अपना गाण्डीव धनुष दूसरेको दे दो, उसका मैं सिर काट लूँगा।' मैंने मन-ही-मन यह प्रतिज्ञा कर रखी है। अनन्त पराक्रमी गोविन्द! आपके सामने ही इन महाराजने मुझसे वह बात कही है, अतः मैं इन्हें क्षमा नहीं कर सकता; इन धर्मभीरु नरेशका वध करूँगा
samakṣa tava govinda na tat kṣantum ihotsahe | tasmād enaṃ vadhiṣyāmi rājānaṃ dharmabhīrukam ||
Санджая сказал: «О Говинда, при тебе самом я не в силах простить это здесь. Потому я убью этого царя, робкого под именем дхармы».
संजय उवाच