अर्जुनस्य शीघ्रप्रयाणं भीम-शकुनियुद्धं च
Arjuna’s Rapid Advance and the Bhīma–Śakuni Encounter
एवमुक्तस्तु कृष्णेन गृह भल्लांक्षतुर्दश । त्वरमाणस्त्वराकाले द्रौणेर्धनुरथच्छिनत्,भगवान् श्रीकृष्णके ऐसा कहनेपर अर्जुनने चौदह भल्ल हाथमें लेकर शीघ्रता करनेके अवसरपर फुर्ती दिखायी और अअश्वत्थामाके धनुषको काट डाला। साथ ही उसके ध्वज, छत्र, पताका, खड्ग, शक्ति और गदाके भी टुकड़े-टुकड़े कर दिये। तदनन्तर अश्व॒त्थामाके गलेकी हँसलीपर “वत्सदन्त” नामक बाणोंद्वारा गहरी चोट पहुँचायी
evam uktas tu kṛṣṇena gṛhītvā bhallān caturdaśa | tvaramāṇas tvarā-kāle drauṇer dhanur atha cchinat ||
Санджая сказал: Так наставленный Кришной, Арджуна стремительно взял в руку четырнадцать стрел-бхалла; ухватив миг, когда требовалась быстрота, он рассек лук Драуни (Ашваттхамана).
संजय उवाच