कर्णपर्व — द्विचक्रिकी युद्धपरिस्थिति: धृष्टद्युम्न- द्रौणि-संघर्षः तथा अर्जुन-रक्षणम्
Chapter 42
नीचस्य बलमेतावत् पारुष्यं यत्त्वमात्थ माम् | अशक्तो मद्गुणान् वक्तुं वल्गसे बहु दुर्मते,“तुमने मेरे प्रति जो कटु वचन कहा है, इतना ही नीच पुरुषका बल है। दुर्बुद्धे! तुम मेरे गुणोंका वर्णन करनेमें असमर्थ होकर बहुत-सी ऊटपटांग बातें बकते जा रहे हो
nīcasya balam etāvat pāruṣyaṁ yat tvam āttha mām | aśakto mad-guṇān vaktuṁ valgase bahu durmate ||
Санджая сказал: «Вот и вся сила низкого человека — грубость речи, какую ты обрушил на меня. Безрассудный, не в силах говорить о моих достоинствах, ты лишь болтаешь множество диких и неуместных слов».
संजय उवाच