Kṛpa’s Archery Display; Śikhaṇḍin Checked; Suketu Slain; Dhṛṣṭadyumna–Kṛtavarmā Clash (कृपशौर्य–पार्षतहार्दिक्ययुद्धम्)
कर्ण उवाच स्वबाहुवीर्यमाश्रित्य प्रार्थयाम्यर्जुनं रणे । त्वं तु मित्रमुख: शत्रुर्मा भीषयितुमिच्छसि,कर्ण बोला--शल्य! मैं अपने बाहुबलका भरोसा करके रणक्षेत्रमें अर्जुनको पाना चाहता हूँ; परंतु तुम तो मुँहसे मित्र बने हुए वास्तवमें शत्रु हो, जो मुझे यहाँ डराना चाहते हो
Карна сказал: «О Шалья! Полагаясь на силу и доблесть собственных рук, я жажду встретить Арджуну на поле брани. Но ты — на словах друг, а в сущности враг — хочешь запугать меня здесь».
कर्ण उवाच