Karna Reproves Shalya; Brahmin Reports on Bāhlīkas; Shalya’s Universalizing Rebuttal (कर्ण–शल्य संवादः)
न हि मां समरे सोदुं संशक्तोडग्निं तरुर्यथा । अवश्यं तु मया वाच्यं येन हीनो5स्मि फाल्गुनात्,जैसे वृक्ष अग्निका आक्रमण नहीं सह सकता, उसी प्रकार अर्जुनमें ऐसी शक्ति नहीं है कि मेरा वेग सह सकें; परंतु जिस बातमें मैं अर्जुनसे कम हूँ, वह भी मुझे अवश्य ही बता देना उचित है
Как дерево не в силах вынести натиск огня, так и Арджуна на поле брани не способен выдержать мой порыв. И всё же то, в чём я уступаю Фалгуне, следует непременно сказать мне.
कर्ण उवाच