अध्याय ८८ — घटोत्कच-दुर्योधनयुद्धवर्णनम्
Ghaṭotkaca–Duryodhana Engagement
अपन क्रात बछ। अं पञ्चाशीतितमोब<् ध्याय: अर्जुनका पराक्रम, पाण्डवोंका भीष्मपर आक्रमण, युधिष्ठिरका शिखण्डीको उपालम्भ और भीमका पुरुषार्थ संजय उवाच स ताड्यमानस्तु शरैर्धनंजय: पदा हतो नाग इव श्वसन् बली । बाणेन बाणेन महारथानां चिच्छेद चापानि रणे प्रसह[,संजय कहते हैं--राजन्! इस प्रकार शत्रुओंके बाणोंसे आहत होकर बलवान् अर्जुन पैरसे कुचले हुए सर्पकी भाँति क्रोधसे लंबी साँस खींचने लगे। उन्होंने बलपूर्वक पृथक्- पृथक् बाण मारकर युद्धमें सभी महारथियोंके धनुष काट डाले
sa tāḍyamānas tu śarair dhanañjayaḥ | padā hato nāga iva śvasan balī | bāṇena bāṇena mahārathānāṃ ciccheda cāpāni raṇe prasahya |
Санджая сказал: О царь! Хотя могучий Арджуна (Дхананджая) был поражён стрелами врагов, он стал тяжело и протяжно дышать от гнева, словно змея, раздавленная ногой. Затем, силой навязывая бой, он одну за другой стрелами рассёк луки великих колесничих, ломая их способность сражаться.
संजय उवाच