भीष्म-युधिष्ठिर-संमर्दः
Bhīṣma’s Pressure on Yudhiṣṭhira; Śikhaṇḍī’s Approach; Evening Withdrawal
स तैर्विकर्णस्य रथात् पातयामास वीर्यवान् | ध्वजं सूतं हयांश्वैव नृत्यमान इवाहवे,भारत! तदनन्तर रथियोंमें श्रेष्ठ पराक्रमी अभिमन्युने विकर्णके ऊपर सर्पके समान आकारवाले चौदह भयंकर भल्ल चलाये और उनके द्वारा विकर्णके रथसे ध्वज, सारथि और घोड़ोंकोी मार गिराया। उस समय वह युद्धमें नृत्य-यसा कर रहा था
sa tair vikarṇasya rathāt pātayāmāsa vīryavān | dhvajaṃ sūtaṃ hayāṃś caiva nṛtyamāna ivāhave bhārata |
Санджая сказал: Теми стрелами могучий Абхиманью сбил с колесницы Викарны знамя, возницу и коней, словно танцуя среди битвы, о Бхарата.
संजय उवाच