भीष्मपर्व — अध्याय ७२: सैन्यगुणवर्णनम्, व्यूहरक्षा, दैव-पुरुषकारचिन्ता
अभ्यधावन्त संक्रुद्धा: परस्परजिगीषव: । ते सर्वे सहिता युद्धे समालोक्य परस्परम्,सबने एक-दूसरेको जीतनेकी इच्छासे अत्यन्त क्रोधमें भरकर विपक्षी सेनापर आक्रमण किया। राजन्! आपकी कुमन्त्रणाके फलस्वरूप आपके पुत्र और पाण्डव एक- दूसरेको देखकर कुपित हो सब-के-सब अपने सहायकोंके साथ आकर सेनाकी व्यूह-रचना करके हर्ष और उत्साहमें भरकर परस्पर प्रहार करनेको उद्यत हो गये
sañjaya uvāca | abhyadhāvanta saṅkruddhāḥ parasparajigīṣavaḥ | te sarve sahitā yuddhe samālokya parasparam |
Санджая сказал: Пылая гневом и жаждая одолеть друг друга, они ринулись вперёд. Все, собравшись для битвы, взглянули друг на друга лицом к лицу — и решимость обеих сторон окрепла, обращаясь в готовность к взаимному удару.
संजय उवाच