Daiva–Puruṣakāra Discourse and the Elephant-Corps Engagement (भीमगजानीक-सम्भ्रान्ति)
सर्वकालिज्ञ्योधेषु पाण्डूनां ध्वजिनीपति: । अब्रवीत् स्वान्यनीकानि युध्यध्वमिति पार्षत:,अद्भुतकर्मा भीमसेनके द्वारा भयभीत कर दिये जानेपर कलिंग देशके समस्त योद्धा जब दल बनाकर भागने और भाग-भागकर पुनः लौटने लगे, तब पाण्डव-सेनापति द्रपदकुमार धृष्टद्युम्नने अपने समस्त सैनिकोंसे कहा--“वीरो! (उत्साहके साथ) युद्ध करो”
sañjaya uvāca | sarvakālajñyo dheṣu pāṇḍūnāṃ dhvajinīpatiḥ | abravīt svāny anīkāni yudhyadhvam iti pārṣataḥ |
Санджая сказал: Тогда Дхриштадьюмна, сын Друпады и военачальник пандавов, всегда чуткий к верному мгновению в бою, обратился к своим полкам: «Сражайтесь, герои!»
संजय उवाच