भूमिगुण-प्रश्नः
Inquiry into the qualities of Earth and the classification of beings
शब्द: स्पर्शक्ष रूपं च रसो गन्धक्ष॒ पठचम: । भूमेरेते गुणा: प्रोक्ता ऋषिभिस्तत्त्ववेदिभि:,शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध--इन पांचोंको तत्त्ववेत्ता महर्षियोंने पृथ्वीका गुण बताया है इति श्रीमहा भारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि सुदर्शनद्वीपवर्णने पडठ्चमो<ध्याय:
śabdaḥ sparśaś ca rūpaṃ ca raso gandhaś ca pañcamaḥ | bhūmer ete guṇāḥ proktā ṛṣibhis tattvavedibhiḥ ||
Санджая сказал: «Звук, осязание, форма, вкус и запах как пятое — так провозгласили риши, ведающие истину, качества земли».
संजय उवाच