भीष्मविक्रमदर्शनं तथा क्रौञ्चारुणव्यूहविधानम् | Bhīṣma’s Ascendancy and the Organization of the Krauñcāruṇa Formation
सम्बन्ध-- इस प्रकार गीताशासत्रके कथन; पठन और श्रवणका माहात्म्य बतलाकर अब भगवान् स्वयं सब कुछ जानते हुए भी अर्जुनकों सचेत करनेके लिये उससे उसकी स्थिति पूछते हैं-- कच्चिदेतच्छुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा । कच्चिदज्ञानसम्मोह: प्रनष्टस्ते धनंजय,हे पार्थ! क्या इस (गीताशास्त्र)-को तूने एकाग्रचित्तसे श्रवण किया?* और हे धनंजय! क्या तेरा अज्ञानजनित मोह नष्ट हो गया?5
kaccid etac chrutaṃ pārtha tvayā ekāgreṇa cetasā | kaccid ajñāna-sammohaḥ pranaṣṭas te dhanaṃjaya ||
О Партха, выслушал ли ты это с умом, собранным в одной точке? О Дхананджая, уничтожено ли в тебе заблуждение, рождённое неведением?
अजुन उवाच