Puruṣottama-yoga
The Discipline of the Supreme Person) — Chapter 15 (Bhagavadgītā
त्वमादिदेव: पुरुष: पुराण- स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् | वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम त्वया तत॑ विश्वमनन्तरूप,आप आदिदेव और सनातन पुरुष हैं, आप इस जगत्के परम आश्रय और जाननेवाले* तथा जाननेयोग्य* और परम धामः हैं। हे अनन्तरूप*! आपसे यह सब जगत् व्याप्त अर्थात् परिपूर्ण हैः
«Ты — изначальный Бог, древний Пуруша; Ты — высшее прибежище этой вселенной. Ты — Знающий и то, что должно быть познано, и высшая обитель. О бесконечнообразный, Тобою пронизан и наполнен весь этот мир».
अजुन उवाच