Puruṣottama-yoga
The Discipline of the Supreme Person) — Chapter 15 (Bhagavadgītā
लेलिहासे ग्रसमान: समन्ता- ल्लोकान् समग्रान् वदनैज्वलडद्धि:ः । तेजोभिरापूर्य जगत् समग्रं भासस्तवोग्रा: प्रतपन्ति विष्णो,आप उन सम्पूर्ण लोकोंको प्रज्वलित मुखोंद्वारा ग्रास करते हुए सब ओरसे बार-बार चाट रहे हैं। हे विष्णो! आपका उग्र प्रकाश सम्पूर्ण जगत्को तेजके द्वारा परिपूर्ण करके तपा रहा है
О Вишну! Твоё грозное сияние, наполняя весь мир теджасом, палит вселенную. Пылающими устами Ты пожираешь все миры; со всех сторон Ты вновь и вновь облизываешь их, словно пламя, что поглощает всё сущее.
अजुन उवाच