उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
वैशम्पायन उवाच पितुर्वचो निशम्यैतद् धृतराष्ट्रोडब्रवीदिदम् । दिष्टमेतत् पुरा मन्ये भविष्यति नरक्षय:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! अपने पिता व्यासजीका यह वचन सुनकर धृतराष्ट्रने कहा--“भगवन्! मैं तो इसे पूर्वनिश्चित दैवका विधान मानता हूँ; अतः यह जनसंहार होगा ही
Вайшампаяна сказал: О Джанамеджая! Услышав эти слова своего отца Вьясы, Дхритараштра произнёс: «О почтенный! Я полагаю, что это издавна предначертано судьбой; потому и будет неизбежна гибель людей».
वैशम्पायन उवाच