Karma-Yoga, Yajña-Cakra, and the Governance of Desire (कर्मयोग–यज्ञचक्र–कामनिग्रह)
संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च | पतन्ति पितरो होषां लुप्तपिण्डोदकक्रिया:,वर्णसंकर कुलघातियोंको और कुलको नरकमें ले जानेके लिये ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जलकी क्रियावाले अर्थात् श्राद्ध और तर्पणसे वंचित इनके पितरलोग भी अधोगतिको प्राप्त होते हैं
Варна-санкара ведёт в ад и губителей рода, и весь род. И предки их также низвергаются, ибо прекращаются обряды подношения пинды и воды — шраддха и тарпана (śrāddha, tarpaṇa).
अजुन उवाच