Karma-Yoga, Yajña-Cakra, and the Governance of Desire (कर्मयोग–यज्ञचक्र–कामनिग्रह)
अपने-आप बछ। अर: पञ्चविशो< ध्याय: (श्रीमद्धगवद्गीतायां प्रथमो<5ध्याय:) दोनों सेनाओंके प्रधान-प्रधान वीरों एवं शंखध्वनिका वर्णन तथा स्वजनवधके पापसे भयभीत हुए अर्जुनका विषाद धृतराष्ट उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव: । मामका: पाण्डवाश्वैव किमकुर्वत संजय,इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्धगवद्गीतापर्वणि श्रीमद्भधगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मुविद्यायां योगशास््त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादेडर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमो5ध्याय:
dhṛtarāṣṭra uvāca | dharmakṣetre kurukṣetre samavetā yuyutsavaḥ | māmakāḥ pāṇḍavāś caiva kim akurvata sañjaya ||
Дхритараштра сказал: «На поле дхармы — Курукшетре — когда собрались мои сыновья и сыновья Панду, жаждущие битвы, что они сделали, Санджая?»
धृतराष्ट उवाच