Shloka 25

आरोग्यबलसम्पन्नो जीवेद्‌ वर्षशतं तथा । एतदू्‌ दृष्टं प्रसादात्‌ तु मया व्यासस्य धीमत:,इतना ही नहीं, इसका पाठ करनेवाला पुरुष आरोग्य और बलसे सम्पन्न हो सौ वर्षोकी आयुतक जीवित रहता है। यह सब परम बुद्धिमान्‌ भगवान्‌ व्यासजीके कृपा-प्रसादसे मैंने प्रत्यक्ष देखा है

И не только это: читающий или произносящий его, исполненный здоровья и силы, живёт сто лет. Всё это я видел собственными глазами по милости мудрейшего Вьясы.

संजय उवाच